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व्यायाम की गति. किसे चुनें और और किन उद्देश्यों के लिए?

व्यायाम की गति आपको क्या सिखाती है?

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व्यायाम की गति. किसे चुनें और और किन उद्देश्यों के लिए?

शायद हममें से कोई भी व्यायाम की हर क्रिया गिनती के साथ नहीं सिखा सकता: श्वास लें, शरीर को नीचे ले जाएँ, रुकें, शरीर को तेजी से ऊपर लाएँ, फिर रुकें. यह दयनीय स्थिति है. यह खोजा गया कि प्रत्येक सेट में कुछ सेकंड का अंतर हमारे शरीर के विकास पर पर्याप्त प्रभाव डाल सकता है.

पहला नियम: अपनी गति को हमेशा देखें

संकुचन की अवस्था और विश्राम के समय की गति में परिवर्तन करने से, आप अनुकूलन के लिए अति उत्तम प्रेरणा पा सकते हैं. आमतौर पर जिम जाने वाला सामान्य व्यक्ति अपनी व्यायाम की गति पर ध्यान नहीं देता. वह केवल वजन के बारे में सोचता है. गुरुत्वाकर्षण का बल ही सब कुछ है. ऐसा खिलाड़ी वजन नीचे ले जाने के लिए जड़त्व का और वजन को ऊपर उठाने के लिए संवेग का प्रयोग करता है. क्या मुझे आपसे कहना चाहिए कि यह कितना गलत है?

ऐसी मूर्खता के स्थान पर आपको वजन उठाने और नीचे लाने की गति पर नियंत्रण करना चाहिए. केवल वे ही क्रियाएँ जो नियंत्रण में होती हैं आपके शरीर को भार के अनुकूलन हेतु उत्प्रेरित करती हैं.

इसलिए, अगली गति शुरुआत करने वालों के लिए उपयुक्त होगी: ऋणात्मक अवस्था के लिए 4 सेकंड (वजन को नीचे लाना) और धनात्मक अवस्था के लिए 1 सेकंड (उठाने के लिए). उदाहरण के लिए, उकडूँ या पालथी में बैठते समय, नियंत्रित रूप से नीचे बैठना 4 सेकंड तक, सीधे खड़े होने की स्थिति में लौटना – केवल एक सेकंड.

इस प्रकार की गति के लिखित परामर्श को “4-0-1-0” से दर्शाया जाता है: 4 सेकंड नीचे जाने के लिए, 0 सेकंड गति की सीमा के निम्नतम बिंदु पर विश्राम के लिए, 1 सेकंड ऊपर आने के लिए और 0 सेकंड उच्चतम बिंदु पर विश्राम के लिए.

यह गति “1-0-1-0” से भिन्न प्रभाव रखती है जिसका अभ्यास दुनिया भर के हर जिम में किया जाता है. उदाहरण के लिए, फिर से उकडूँ या पालथी में बैठने को ही लें, आसानी से समझने के लिए, आइये 60 किलो वजन के साथ 10 दोहराव वाला एक सेट लें. यदि हम “4-0-1-0” गति का प्रयोग करें, 5-सेकंड के दोहराव के साथ प्रत्येक सेट 50 सेकंड तक चलेगा. यदि, अन्य स्थितियों को ना बदलें, तो “1-0-1-0” गति अपनाने पर पूरा सेट केवल 20 सेकंड लेगा. आधे मिनट का अंतर अत्यंत विशाल है. यदि आप “1-0-1-0” का प्रयोग कर रहे हैं तो इन 20 सेकंड में मांसपेशियों के कई रेशों के पास कार्य में संलग्न होने के लिए पर्याप्त समय नहीं होगा.

लम्बे समय तक बनी रहने वाली और अधिक विचित्र अवस्था के साथ गति का प्रयोग करके आप मेटाबोलिज्म पर और अधिक दबाव डालते हैं, लेकिन केवल “4-0-1-0” का प्रयोग गति को बेहतर तरीके से नियंत्रित करने का, अधिक भार अर्जित करने का अवसर देता है और संयोजी ऊतकों की स्थिति पर अधिक प्रभाव डालता है.

गति का लिखित परामर्श “1-0-1-0” अर्थात भारी वजनों का प्रयोग (1 आरएम के 85% का), मजबूती के सूचकों में सुधार पर इसकी गणना और शक्तिशाली यांत्रिक भार के कारण तंत्रिका सम्बन्धी क्रियाओं में बढ़ोतरी.

दूसरा नियम: व्यायाम की गति भार के प्रति आपके शरीर की अनुकूलन क्षमता को प्रदर्शित करती है

गति पर नियंत्रण के बिना आप भार के लिए शरीर की अनुकूलन क्षमता प्राप्त नहीं कर सकते. इसका अर्थ यह है कि आपका उचित और दिखाई पड़ने वाला विकास नहीं होगा. इस कथन को तीन-सप्ताह के एक शोध द्वारा अधिक समझाया जा सकता है. इसके दौरान वैज्ञानिक बेंच प्रेस के प्रभाव का अध्ययन कर रहे थे. एक समूह ने व्यायाम करने की बढ़ी हुई गति का प्रयोग किया; अन्य का प्रशिक्षण गति के सम्बन्ध के बिना हुआ. परिणाम ज्ञात थे: बढ़ी हुई गति वाले समूह के मजबूती सूचकों में 10% की वृद्धि हुई. दूसरे समूह की कोई प्रगति नहीं हुई. एक अन्य सर्वेक्षण था जिसने ये अध्ययन किया कि दोहराव की गति का आकार और शरीर के गठन पर कैसे प्रभाव पड़ता है. गति का परामर्श लेग कर्ल्स के लिए “1-0-1-0” और “6-0-6--0” था. परिणाम उत्साहवर्धक थे: वे खिलाड़ी जिन्होंने “6-0-6-0” का प्रयोग किया उनके भार में व्यायाम समाप्ति के 24 घंटों बाद तक तीन गुना से अधिक की वृद्धि हुई. यह दर्शाता है कि मांसपेशियों की पर्याप्त संख्या को सूक्ष्म चोट पहुंची. दूसरी तरफ, “1-0-1-0” का प्रयोग शक्ति के विकास पर तंत्रिका तंत्र को निर्धारित करने में सफल रहा.

तीसरा नियम: वसा को भस्म करने के लिए अपने व्यायाम की गति में बदलाव करें और एनारोबिक प्रशिक्षण को वरीयता दें

व्यायाम हेतु विभिन्न गतियों का प्रयोग वसा कम करने का अति उत्तम प्रकार है. इस मामले में व्यायाम समाप्ति के बाद ऑक्सीजन की खपत बढ़ जाती है, और इसीलिए हमारे शरीर पर प्रभाव डालने वाला, मेटाबोलिक दबाव भी बढ़ जाता है.

इसीलिए, कुछ वर्षों पूर्व एक प्रायोगिक अध्ययन ने दर्शाया कि धीमी गति (“4-0-4-0”) चुनने से अधिक कैलोरी नष्ट होती हैं. साथ ही, इस प्रकार के व्यायाम को समाप्त करने पर शरीर “1-0-1-0” गति की अपेक्षा अधिक ऑक्सीजन की खपत करता है.

निश्चित रूप से यह प्रत्यक्ष है कि “4-0-1-0” गति के साथ आप अधिक ऊर्जा खोएंगे क्योंकि मांसपेशियाँ अधिक समय तक तनाव में रहेंगी. लेकिन हमें ये नहीं भूलना चाहिए कि समय समय पर गति का परिवर्तन भी बढ़िया बात है. यह शरीर को प्रशिक्षण और उसके बाद दोनों स्थितियों में अधिक ऊर्जा के व्यय के लिए तैयार करता है.

इस सबके साथ वैज्ञानिकों ने व्यायाम की गति के बारे में कई निश्चित निष्कर्ष निकाले:

  • व्यायाम प्रशिक्षण ऊर्जा के व्यय को बढ़ाने का सबसे अधिक प्रभावी मार्ग है, जो हमारे शरीर के एनारोबिक ऊर्जा तंत्र को सक्रिय करता है, लेकिन एरोबिक को नहीं करता. इस तंत्र में कथित तौर पर पश्चभस्मक प्रभाव होता है जब शरीर ठीक होने की अवधि के दौरान और अधिक कैलोरी भस्म कर रहा होता है (और यह अवधि अन्य तंत्र में ठीक होने की अवधि से लम्बी होती है);
  • एनारोबिक तंत्र को सक्रिय करने का सबसे आसान तरीका है समय-समय पर व्यायाम की गति को बदलना. मांसपेशियों के बड़े समूहों के व्यायाम में गति बदलें: उकडूँ या पालथी में, रो में, प्रेस में. 1 आरएम के 65-85% तक का प्रयोग और एक सेट में 30 सेकंड से 1 मिनट व्यतीत करना सर्वोत्तम होता है.

चौथा नियम: मांसपेशियों का भार बढ़ाने के लिए व्यायाम की गति परिवर्तित करें

बावजूद इस तथ्य के कि जितना अधिक समय मांसपेशियाँ वजन सहन करेंगी उतनी अधिक वसा भस्म होगी, यह पाया गया है कि गति में वृद्धि लैक्टिक एसिड के उत्पादन को बढ़ाने हेतु उत्प्रेरित करती है. यह विकसित करने वाले हार्मोन की बढ़ी हुई प्रतिक्रिया से सम्बंधित होता है और बेहतर अनुकूलन के लिए तेज ऐंठन वाले रेशों का प्रयोग करता है.

शोध, जो 2012 में हुए, ने दर्शाया कि रक्त में लैक्टिक एसिड तब अधिक एकत्रित हुआ जब व्यक्तियों ने बजाए हर सेट को धीमी या मध्यम गति से करने के, आठ दोहराव वाले तीन सेट किये और प्रत्येक में 1 आरएम के 60-70% का प्रयोग किया.

व्यायाम की बढ़ी हुई गति अनुभवी खिलाड़ियों को रास आती है जो अपनी शक्ति और मांसपेशियों की अतिवृद्धि को बढ़ाना चाहते हैं. इस मामले में उन्होंने मांसपेशियों के सबसे मजबूत रेशों को संलग्न किया. हालाँकि. ऐसी प्रक्रिया का प्रयोग करने के पहले आपको अपने आधार के बारे में विश्वास होना चाहिए, आपके संयोजी ऊतकों को बढ़िया स्थिति में होना चाहिए और गंभीर कार्यभार के लिए तैयार होना चाहिए.

पाँचवा नियम: व्यायाम की गति को परिवर्तित करके शक्ति सूचकों को सुधारें

संभवतः आप जानते होंगे कि शक्तिशाली होने के लिए आपको भारी वजन के साथ अभ्यास करना चाहिए. “भारी” अर्थात 1 आरएम से 85% तक का. साथ ही बढ़ती हुई गति का प्रयोग करते हुए इस प्रकार के वजन के साथ प्रति सेट 6 दोहराव होने चाहिए. इस प्रकार की प्रशिक्षण प्रक्रिया हलके वजन और तेज गति के साथ व्यायाम करने के मुकाबले शक्ति में अत्यंत अधिक वृद्धि करती है.

तो भी, कड़ा प्रशिक्षण मांसपेशियों के अनुकूलन को उभारने वाला एकमात्र तरीका नहीं है; खासकर शुरुआत कर रहे लोगों के लिए (उनमें शरीर पर पड़े प्रत्येक भार के लिए एनाबोलिक प्रतिक्रिया होती है). उदाहरण के लिए, एक अन्य प्रायोगिक सर्वेक्षण ने दर्शाया कि मांसपेशियों के असफल होने का कारण धीमी गति के साथ अपनाया गया तरीका था और मध्यम कार्य वजनों के साथ (1 आरएम का 50-60%) प्रत्येक उत्केंद्रित अवस्था में 4 सेकंड का तरीका शक्ति सूचकों में कम से कम 10% की वृद्धि करता है. दूसरी तरफ व्यायाम की धीमी गति मांसपेशियों के मजबूत रेशों- टाइप II रेशों की वृद्धि को उत्प्रेरित करने पर लक्ष्य करती है.

मध्यम श्रेणी के वजनों के साथ व्यायाम की धीमी गति नियमित व्यायाम प्रक्रिया का वह मुख्य घटक है जो चोटों के बाद ठीक होने में सहायता करता है. यह प्रक्रिया चोटग्रस्त क्षेत्र में रक्तप्रवाह को उत्प्रेरित करती है और क्षतिग्रस्त मांसपेशियों को ठीक होने में सहायता देती है.

छठा नियम: बेहतर परिणामों के लिए बढ़ी हुई गति के साथ प्रशिक्षण लें

ऊपर वर्णित किये गए सभी बिन्दुओं का ध्यान रखें तो बढ़ी गति का प्रयोग शरीर के विकास और उच्च परिणामों की प्राप्ति का सर्वोत्तम तरीका है. यह बल और भार को एक साथ बढ़ाने में सहायता करता है.

पिछले वर्ष शोधकर्ताओं ने असफल होने वाले प्रशिक्षण के लिए 4 प्रकार की गति के लिखित अनुदेशों की तुलना की:

  • 1 आरएम का 55% – मांसपेशियों की क्षमता हेतु “4-1-4-1” गति का प्रयोग करते हुए;
  • 1 आरएम का 55% – चाल और शक्ति की क्षमता हेतु बढ़ी हुई गति का प्रयोग करते हुए;
  • 1 आरएम का 85% – अधिकतम शक्ति के लिए बढ़ी हुई गति का प्रयोग करते हुए;
  • 1 आरएम का 70% – अतिवृद्धि “2-1-2-1” गति का प्रयोग करते हुए.

परिणामों को विश्लेषित करके, वैज्ञानिकों ने अगले निष्कर्ष निकाले:

  1. उच्चतम बल प्राप्त करने के लिए आपको बढ़ती हुई गति और 1 आरएम का 30-60% के साथ प्रशिक्षण लेना चाहिए;
  2. 1 आरएम के 85% वजनों के साथ व्यायाम करना भी उच्चतम बल पर लक्ष्य करता है यदि व्यायाम करने वाले व्यक्ति नियंत्रण में और धीमी गति का प्रयोग करते हुए व्यायाम करें;
  3. आवश्यक समय (30 सेकंड) की गणना, उच्चतम शक्ति (1 आरएम का 85%) पर लिखित अनुदेश, सर्वोत्तम परिणामों तक पहुँचता है. अनुभवी खिलाड़ी भारी वजनों के साथ तेज गति का प्रयोग करते हुए प्रशिक्षण ले सकते हैं, जिससे समय बचता है और व्यायाम की अवधि को घटाया जा सकता है.

सातवाँ नियम: मांसपेशियों की शक्ति तेजी से विकसित करने के लिए आपको व्यायाम की गति बदलना चाहिए

इसे समझना और ध्यान देना कठिन नहीं है कि आदर्श और व्यायाम करने की केवल एक उचित गति का कोई अस्तित्व नहीं है. इच्छित परिणाम पाने के लिए आपको व्यायाम करने की गति को लगातार बदलते रहना चाहिए. यह कई बार लिखा जा चुका है, किसी खिलाड़ी की सबसे बड़ी गलती, किसी एक कार्यक्रम के आधार पर कई महीनों या वर्षों तक प्रशिक्षण लेना, होती है. इससे मांसपेशियों का लाभ नहीं होता, शक्ति नहीं बढ़ती या सम्पूर्ण परिणामों में सुधार नहीं होता. और निश्चित रूप से इस प्रकार से समय नष्ट करना अत्यंत उबाऊ होता है.

इसलिए, यदि आपको दिखाई देने वाले परिणाम चाहिए, अपने प्रशिक्षण की अवस्थाओं को नियमित परिवर्तित करें. “नियमित” अर्थात डेढ़ से दो माह का समय, ना कि सप्ताह में दो बार.

सबसे पहले एकत्रीकरण की अवस्था पर एकाग्र हों; प्रशिक्षण की धीमी गति और प्रभावी घनत्व. इस अवस्था का बाद आप गति को तीव्र करने की अवस्था पर जाएँ. इसका निश्चय शक्ति के विकास पर होता है. इस अवस्था में आपको तेज गति और भारी वजनों के साथ प्रशिक्षित होना चाहिए.

गति के लिखित अनुदेशों के साथ प्रशिक्षण के नव ज्ञान को धन्यवाद, जैसे ही आप इसे जानेंगे, परिणाम अत्यंत शीघ्र आएंगे. 

हम इस कार्य के लिए सभी खिलाड़ियों के सौभाग्य की कामना करते हैं.

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